सोमवार, 22 अक्तूबर 2018

आये थे हरि भजन को ....... [व्यंग्य ]

आये थे हरि भजन को .......  [व्यंग्य ]
                                   
                      आज एक धर्म समागम में बाबाओ के मंत्री बनने की खबर  से वातावरण गर्म था और  प्राकृतिक गर्मी अपना असर अलग दिखा रही थी l  चल पड़ी बहस इस विषय पर l एक वरिष्ठ नागरिक  मुकुंदबिहारी जी हमेशा  बाबाओ से खफा  ही रहते है आज उनका खफायपन चरम पर था l 
                               वे कहने  लगे कि बाबा क्या है ?बाबा एक सम्मान  सूचक शब्द है l इसीलिए तो संत /महात्मा को  'बाबा "कहा  जाता है याने  कि  वे श्रद्धा के पात्र है lसच्चे बाबा अब कहां  है ? बाबा और भक्त अपने अपने स्वार्थ में उलझे है l बाबाओ ने ऐसा कोई क्षेत्र न छोड़ा होगा  , जहां घुसपैठ न की हो l घुसपैठिये बाबा समाज का क्या भला करेंगे ? बाबा और  भक्त दोनों ही आत्ममुग्धता के मारे है l आये थे हरि  भजन को कुछ  और  ही गजब करने लगे l देशी बाबा के नाम विदेशी , संस्कारो की कर दी ऐसी तैसी l  संत कबीर कहते है --

साधु भूखा भाव का धन का भूखा नाहीं ।
धन का भूखा जो फिरै सो तो साधु नाहीं ॥ 
               धर्म समागम में तो सीनियर सिटीजन का  ही कब्जा रहता है पर आजकल इनकी  मोनोपॉली   खतम  होने की कगार पर है  ,युवा भी करे तो क्या करे ? पकोडे भी कितने तले चले आते है , ऐसी जगह l आधुनिक गाने  पर डांस पर डांस करते नहीं थकते आये थे हरि  भजन को करने लगे  भोंडे डांस l कहना था  जनक जी  का ,वे न युवा थे और न सीनियर सिटीजन l बाबाओ के क्रिया कलापो से अच्छे खासे  रोष में  थे अपना  होश  खोये जा रहे थे l तथाकथित बाबाओ ने धर्म के नाम पर भक्तो को ठगने का धंधा बना लिया है कुछ ने बाबियाँ भी पाल  रखी है शर्म तो जब आती है अच्छे अच्छे नेता चरणचाटन की क्रिया करते है जिससे तथाकथित बाबाओं  और बाबियों  के दिमाग सातवे आसमान पर पहुंच जाते है l 
                                              मुकुंदबिहारी जी फिर  सबकी बात काटते हुए कहने लगे                 बाबा क्यों बनते है ?और बन भी गए  थे तो अपनी आत्मा की शपथ  क्यों  भूल जाते है ?और उनका दिल मानता नहीं है और गजब गजब के कारनामे करते है l आये दिन बाबा काण्ड उजागर होते रहते है जनता फिर भी इनकी पिछलल्गू बनी रहती है कोई चमत्कार की आस मेंl  बाबा भी ऐसे ऐसे  चमत्कार करते है  की  भक्त भी शर्मसार हो जाते है l 
     भक्तो को ऐसे सम्मोहित करते है कि  भक्त भी  तन मन और धन से  समर्पित हो जाते है यह भी कला है और  बाबा  भी  इस  कला के कलाकारी में निपुण हो जाते है l कहावत है की सेर को भी सवा सेर मिलता है और पाखण्डी बाबाओं  की गुप्त करतुतो की पोलखोल कर उन्हें  सलाखों के पीछे भेज देते है l 
                            इसमें युवा शक्ति की आवाज आयी की कुछ बाबा   ऐसे  भी  है सरकार  की औकात   दिखाते दिखाते अचानक मंत्री बन जाते है  राजा के प्रति सब दुर्भाव   भूलकर उसके किये गए कर्म जो कल तक बुरे थे आज सराहे  जाने लगते है l लालीपाप से   बच्चो को पिघलते देखा था  अब साधु संत भी लालीपाप के शौकीन हो गए  ,इसे मिलते ही पलटी मार  देते है  बाबा भी  अब  पलटी मार भी होने लगे है और राजनीति शरणम गच्छामि करने लगे  है l भक्त भी बड़े कौतुक से इस घटना को देख कर  टेन्स  हो जाते है  l राजा  दशरथ  के राज्य में  साधु संत ने  कभी  मंत्री बनने की लालसा नहीं रखी l असली संत तो राज के ऊपर होता है और नकली संत राजा की दासता  स्वीकार कर उसके गलत कामो के सहयोगी बन जाते  है l पलटीमार बाबा क्या  हरी भजन कर अध्यात्म की अलख जगायेंगे ?
                                पढ़े लिखे मारे मारे  फिरे ,बाबा मंत्री आज l 
                                 कठपुतली  बन रह  गये ,अनपढ़ करते राज ll 
                                        

                        मेने भी अपनी जबान खोली  ताकि बहस का अंत जल्दी हो दुनिया में और भी है गम .. समय है कम  l   आजकल हर कोई अपने उदेश्य से भटककर  राजनीति  की अनीति को अपनाने लगता हैl  सब को नेतागिरी  का चस्का  जो लगा है ,अधिकारी ,बाबा ,व्यापारी और उद्योगपति अपनी  संभावना राजनीति  में ही तलाशते है l सियासत की चकाचौंध से प्रभावित  होकर  राजनीति  करने लगे है l  कुछ  व्यापारी हो   गये   l हमारी  संस्कृति  का आधार  संत ,मुनियो  से है वे धर्म और संस्कृति को बचाने का  काम  क़र  रहे है कुछ अपवाद तो हर जगह है जिन्होंने बाबा होने की  मर्यदा को   तार  तार कर  दिया  l   बाबाओ  से  डर  लगता है  ? क्योकि 
एक प्रसिद्द लोकोक्ति है --आये थे ह्री भजन को -ओटन लगे कपास ----l 

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