गुरुवार, 29 अगस्त 2013

व्यंग्य



                                                 == अप्रैल फूल ==

मेरे मित्र जो पेशे से सरकारी स्कूल में हेड मास्टर के पद पर पदासीन है ,चर्चा ही चर्चा में अप्रैल फूल यानि मूर्ख दिवस 1 अप्रेल को ही क्यों मनाया जाता है इस विषय ने तगड़ी बहस को जन्म दे दिया और इस पर बहस चल पड़ी , मै सहजता से पूछ बेठा की मूर्ख की क्या परिभाषा है आपके दैनिक जीवन में इस शब्द का महत्व पूर्ण स्थान है ,मास्टर जी बगले झाकने लगे और कहने लगे की कभी गम्भीरता  से इस पर  चिन्तन नही किया, मैंने कहा यू भी चिन्तन का आपके पेशे से दूर-दूर तक वास्ता नही है सरकार के अधिकारी जो कहे वो ही तो करना है आपको I मास्टर जी को  यह पता नही बाकि का क्या हाल होगा ,बेचारे बच्चे क्या जाने ,रोज सुनते है सुनना उनकी नियति है I

आपना खुद का सामान्य ज्ञान भी कहाँ ज्यदा है सोचा थोडा बड़ा लिया जाय .,मेरे पास उपलब्ध पुस्तको को उल्टा-पलटा तो विदुर निति से सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त हुआ ,आप जानते ही महाभारत काल का  हश्र।फिर भी मुझे तो मास्टर जी को अपना किताबी ज्ञान बाटना ही था सो उन्हें विदुर निति अनुसार मूर्ख किसे कहते है मास्टर जी ने  जिज्ञासा भरी नजरो से मुझे घुरा ...मेने  उन्हें कहा की विदुर निति में ...ऐसे लोगो को मूर्ख कहते है - जो शास्त्र शून्य होकर भी अति घमंडी है ,बिना कर्म के धन प्राप्त करता हो ,अपने कार्य को छोडकर शत्रु के पीछे दोड़ता हो ,मित्र के साथ कपट व्यवहार ,मित्र से द्वेष, विश्वास घात ,झूठ बोलने वाला ,गुरु ,माता ,पिता और महिला का अपमान करता हो,आलसी हो ,बिना किसी काम का  हो  वह मूर्ख की श्रेणी में आते है I स्वयं दूषित आचरण करता हो और दुसरो के दोष की निंदा करता हो वह महामूर्ख कहलाता है I मास्टर जी बोले इस प्रकार  धरा पर कोई भी इससे अछुता नही है, ,हम बेचारे छात्रों को अपमानित करते रहते है पढ़ा लिखा मूर्ख अनपढ़ मूर्ख से अधिक मूर्ख होता है , हमारा देश मूर्खो और महामूर्खो से भरा पड़ा है I

हमारे देश में एक जुमला प्रसिद्ध है की मूर्ख मकान बनाते है और बुद्धिमान उसमे रहते है एक बार मकान किराए पर लेकर जिन्दगी भर मकान मालिक को मूर्ख बनाते  रहते है  और कोर्ट तक चप्पले घिसवाते है Iचुनाव में वोट  के लिए चापलूसी कर फिर जनता को पांच साल तक जनता को मूर्ख बनाते है और हम सहते रहते है , मंदी की मार का खोप बताकर सरकर कीमते बड़ाकर जनता को आये दिन मूर्ख बनाती है  है इमानदार टेक्स चुकता है और मूर्ख उसका आनन्द लेते I मुर्खता की भांग देश में घुली पड़ी है हर एक दुसरे को मूर्ख बनाता है ओर समझता भी है I

मास्टर जी  को हताश होते देख कर उन्हें बतया की देश में कुछ बुद्धि जीवी है जो  अपने आप को  कालिदास के वशंज मानते है वे फिर अपने तेवर में आगये ,और देश के नेताओ और सरकारी तन्त्र के सरकारी अफसरों को कोसने लगे इन्ही सबने मिलकर देश का बंटा ढाल कर दिया ,मुर्खता पर नोबल पुरुस्कार यदि होता हो तो देश के किसी  नामी गिरामी भ्रष्ट को ही मिलता ,उनका आवेग देख कर उन्हें रोकने के लिए 'इडियट "फिल्म का उदाहरण देकर सामान्य करने की कोशिश करने प्रयास किया  की इस फिल्म ने यही धारणा को उजागर किया की मूर्ख महान होते है वे इश्वर की सर्वोतम कृति है देश में यह किस्म बड़ी तादाद पाई जाती है

मूर्खता करना हमारा  जन्म सिद्ध अधिकार है जब तक सूरज -चाँद रहेगे मूर्ख ओर मुर्खता जिन्दा रहेगी ,मास्टर जी गर्वित होकर बोले हम तो बचपन से ही एसी प्रतिभा को पहचान लेते है और मूर्ख कह देते है बनना तो निश्चित है हम  भावी पीडी के जनक ठहरे है इनकी नीव स्कूल ,कालेज ..से ही शुरू होती है हम जेसे बुद्धि जीवी इसके दाता है I मेने कहा धन्य है मास्टर जी मुझे आज पता चला है की आप मूर्ख प्रदाता है इस देश को I मुझे मुर्खता से इतनी तकलीफ नही होती ,जितनी इसे ही अपना गुण समझने वालो से ,केवल मृत व्यक्ति और मूर्ख अपनी राय नही बदलतेIमूर्खता  के आलावा कुछ  पाप नही होता है Iमुर्खता सब कर लेगी पर बुद्धि का आदर कभी नही करेगी ,अत: मास्टर जी सोचो हम कहाँ है I

मूर्ख और मूर्खता को  सहेज ने के लिए देश में कई मंचो ने  अनेक कार्यक्रम लांच कर रखे है जो मूर्ख और मूर्खता को स्वीकार करने में नही हिचकते और पूरी मुस्तेदी से वर्ष भर अंजाम देकर एक दिन उसको अभिव्यक्त करते नही थकते जेसे मूर्ख ,महामूर्ख .टेपा खांपा,कबाड़ा गुलाट आदि सम्मेलन है  इनका जन्म भी  इसी लिए  हुआ  जो आपने आप को मूर्ख मान कर उपहास करने उपक्रम करते है .मूर्खता का अंत सम्भव नही लगता है और हम १ को अप्रैल फूल यु  ही मनाते रहेगे I जो मूर्ख की श्रेणी में आते हो और अपने दिल से माने ..उन सभी को..अप्रैल  फूल की बधाई .....I

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें