गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

नीलामी को सलामी [व्यंग्य ]

        

             नीलामी को सलामी
                
        आईपीएल के नये सेशन हेतु देशी और विदेशी  खिलाडी  उपलब्ध है  खिलाड़ियों को खरीदने  का समय चल रहा है अपने आप को ऊँची से ऊँची राशि  में नीलाम  करना शुरू हो गया है  इतनी राशि की आप सोच भी नही सकते लाखो से लेकर करोड़ो में लगा रहे है अपनी कीमत I पहले भी इसी तरह की नीलामी होती रही है इतनी-इतनी राशि में नीलाम होने के बाद भी रुपयों की भूख खत्म नही होती और आये दिन मेच में सट्टे और फिक्सिंग का बाजार गर्म रहता है मुख में राम और बगल में छुरी की तरह I

      नीलामी शब्द बचपन से हमारे जेहन में ठूंसा हुआ है
और समाचार पत्रों में नीलामी की विज्ञप्ति ,...जो  ,रोडवेज की खटारा बस की या सरकार व बेंक द्वारा राजसात की  गई संपत्ति नीलामी  की सूचना होती थी बडो से सुनते थे कि जो उपयोग लायक नही होती है  उनकी नीलामी होती है  जिससे दिलो दिमाग में  यही छाप पड़ी है I किसी की पेंटिग ,महापुरुष की दुर्लभ वस्तु की  नीलामी का समाचार  सम्मान दायक महसूस होता था   सब्जी मण्डी में सब्जी की ,पशु हाट में पशु की  इनकी शैली कुछ हट के होती थी ..दलाल जोर -जोर से कीमत लगाते थे यह  शब्द कुछ हल्का लगता था पर आईपीएल में इसे सम्मानजनक स्तर प्राप्त है छोटा काम अगर बड़ा करे तो बड़ा और अच्छा हो जाता है I हर तरफ उसके जलवे दिखते है

   हमारे मोहल्ले में एक पहलवान रहते थे उनके कई पठ्ठे थे
वह हमेशा कहा करते  थे सब कुछ करना पर इज्जत नीलाम मत करना  बस यही सुनते आये इस कारण यह समझ  आता था की अपने आप को बेचना  या नीलाम करना याने आपना पूरा   वजूद खो देना होता है ,यह इज्जत का  पैमाना है

      मुझे तब बड़ा आश्चर्य होता है कि धार्मिक आयोजन में भी नीलामी  का अपना महत्वपूर्ण स्थान है जो जितनी अधिक बोली  लगाता  है उसे भगवान की सेवा का उतना अधिक सौभाग्य मिलता है  धन के सामने  श्रद्धा का हनन होता है भगवान का दरबार भी इससे अछूता नही है तो हमारे देश में  क्रिकेट खेल इससे अछूता कैसे रह सकता  है और नीलामी का दौर चल पड़ा है बिकने वाले और खरीदार दोनों खुश I

       अगर ऐसा ही चलता रहा तो कही सरकार को सरकारी समर्थन मूल्य की घोषणा  न करनी पड़े या सरकार खरीद कर  फिर इन नीलामी वालो को दे जिससे राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता के आधार पर खरीदा  जा सके I

 
आईपीएल में खिलाडियों  के करोड़ों  के भाव चल रहे है  जो जितने अधिक  में बिक रहा है वह उतना महान है रुपयों की लिए बिकने वाले  ये खिलाडी क्या देश कि लिये  अपने को और अपने खेल को .समर्पित कर पाएंगे इसमे हर किसी को  संदेह नजर आता है कभी - कभी सोचना मुश्किल ही नही नामुमकिन लगता है कि धन के लिए खलेने वाले ये खिलाडी क्या अपने देश के लिए न्याय  कर पाएंगे ? अपार धन की भूख ने क्रिकेट को किस मुकाम पर खड़ा कर दिया की २० -२०  ओवर का मेच ही भाता है टेस्ट और  एक दिवसीय मैच में तू चल में आया की तर्ज पर  लगातार विकेट  गिरना ओर मैच को हार की कगार पर ले जाते है, ओर  देश की भोली -भाली भावुक जनता गम के साये में रहती है Iये खिलाडी धन की और अधिक पिपासा में .नीलामी को सलामी करते रहेगे ओर देश की इज्जत नीलाम को  करने में कोंई कसर नही छोड़ेगे I क्रिकेट में धन की चकाचौंध  ने दूसरे खेलो को   तो पहले ही  चौपट  कर दिया जो हमारे महत्वपूर्ण खेल हुआ करते थे उनमे हम फिस्सडी हो गये I


   देश की व विदेशी धरती पर मैचों में मिलती असफलता
को बुद्धि जीवी और खेल प्रेमी  हमेशा यह कह कर आसनी से पचा लेते है कि खेलों में हार जीत तो चलती रहती है  कोई एक तो  हारेगा पर यह हार का सिलसिला यूँ ही चलता
रहेगा जब
  तक खिलाडी नीलाम  होते रहेगे,तब तक आईपीएल तेरा नाम रहेगा नीलामी को सलामी चलती रहेगी I

 
  संजय जोशी " सजग "

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 15/02/2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    कृपया पधारें ....धन्यवाद!

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  2. sach to ye hai ki cricket me adhik bhrshtachar vyapt hai Shriniwasan hatenge dhoni bhi poori tarah bhrsht vykti hain mach fixing me shamil hain .........fir kya ummed karen aur kis se ?

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  3. भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी व्याप्त हैं.......इस चिंतनीय आलेख के लिए ...बधाई....
    शुभकामनाएं.....मेरे ब्लॉग पर स्वागत है आपका ......

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  4. नीलाम लोगों के लिए क्या धर्म. कैसा देश? सब कुछ पैसा ही तो है जो धर्म बन गया.देश यदि उम्मीद करता है तो ज्यादती ही है,बेचारे धोनी रैना श्रीसंत चंदीला जैसे लोग इतने महंगे बिक कर भी ईमानदार खेल न खेल पाये पैसे ने सब कुछ बिगाड़ दिया

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