रविवार, 4 मई 2014

आज विश्व हास्य दिवस है ....आज तो मुस्कराइए ......[व्यंग्य ]








आज तो मुस्कराइए ......[व्यंग्य ]

आज विश्व मुस्कान  दिवस के अवसर पर मुस्कुराना हमारी मजबूरी है औपचारिकता का तकाजा है आज जो हंसने का अभिनय नही करेगा उसे आधुनिक नही माना जायगा .आज सभी इलेक्ट्रानिक संचार माध्यम मुस्कान को बिखेरेंगे ,विश्व मुस्कान  दिवस में अपनी भागीदारी  दर्ज करने में व्यस्त रहेंगे

       सच में हम ईश्वर  प्रदत्त मुस्कान भूल  गये है ऐसे में  दिवस  याद दिलाते रहेंगे कि मुस्कान भी जीवन के लिये  जरूरी है क्योंकि आजकल  नेचरल मुस्कान की  जगह  सांकेतिक मुस्कान का दौर चल रहा है .इंटरनेट ओर मोबाईल .....से  आभास ..होता रहता है ...दिल से हँसना अब बचा कहाँ है 

  कोई जबरन  बनावटी मुस्कुराहट  बिखेरता है  तो कुटिलता की श्रेणी में माना  जाता है मुस्कुराहट जीवन से ऐसे गायब  है जैसे गधे के सिर से सींग योंग ध्यान के महायोगी भी  शरीर के अंदर से मुस्कुराहट खींचने में सफल नही हो पाये है क्योकि तनाव सब पर भारी है उन्मुक्त हंसी  तो अब  सिर्फ . ...टूथ पेस्ट के विज्ञापन में ही नजर आती है

हँसना और मुस्कुराना सामाजिक परिवेश पर भी निर्भर करता है  ,वर्तमान प्राकृतिक राजनीतिक .सामजिक ..व्यथा इसकी अनुमति नहीं देती ..और रही सही कसर हमारे न्यूज़ चैनल्स किसी भी मुद्दे  के चिंता  करने की ठेकेदारी ...इनकी ही तो है ये मुस्कान को  उभरने ही नहीं देते

  बच्चे शिक्षा के बोझ तले उन्मुक्त और सहज हंसी से वंचित है मजे तो हमने खूब किये हमारे जमाने में.ये बेचारे  मुस्कराना ही नही जानते तो ..खिलखिलाहट ....की क्या बात करें हंसने मुस्कराने की क्षमता  भगवान ने केवल मनुष्य  को ही दी अन्य प्राणियों को नही मनुष्य फिर भी न हँसता है न हसंने देता  हैं, इसका मतलब  शायद .हम ..पशुता की और अग्रसर है मुस्कराना भी एक कला है और जो दूसरों को मुस्कराने को मजबूर कर दे वह महा कला है .मुस्कान भी कोटि -कोटि की होती है जो इसे सही पहचाने वह महामानव होता है
     मुस्कान स्वास्थ्य को अच्छा और रक्त संचार नियंत्रित रखती है यह डाँक्टर का काम करती है अत:डाँक्टर मुस्कान कह सकते है मुस्कान एक  अस्त्र का काम भी करती है जो कई को  घायल और कायल बना देती है एक मुस्कान बदले आपकी जिन्दगी ...मुस्कुराते रहिये


मेरे मित्र हंसमुख भाई ..मिले मैंने उनसे कहा . एक बार मुस्कुरा दो वह बोल उठे क्यों मैंने कहा ..भाई ..आज विश्व मुस्कान दिवस है . वे सड़ा सा मुँह बना के बोले कैसे हंसू देश और समाज का सत्यानाश हो गया है दर्द इतने बढ गये की मुस्कान आती नही बाय चांस भी नही आती क्योकि बचपन में दोस्त कहते थे हंसा की फंसा   उसे आज तक मान रहा हूँ मैंने छेड़ते हुए कहा कि  आपका नाम  हंसमुख  किसने रखदिया वह बोले ..नाम में क्या धरा है हंसमुख की व्यथा सही थी कदम -कदम पर जीवन की राह कठिन ,बढती महंगाई, बढ़ते अत्याचार, बलात्कार ,भ्रष्टाचार ,झूठ ,फरेब ऊपर से घोर मंदी गिरते रुपये   के चलते मुस्कराहट न आना लाजमी है
      अपराधी चुस्त ,सरकार सुस्त ..हम कैसे रहे तंदरुस्त  ..ने आम आदमी ..की ख़ुशी और मुस्कान को  ग्रहण लगा दिया है .मुस्कान मांगने पर भी नही मिलती ....फिर भी आज तो मुस्कराइए ......

संजय जोशी 'सजग '

2 टिप्‍पणियां:

  1. हँसने के लिए भी याद दिलाना पड़ता है....सुन्दर व्यंग्य !!

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